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हिंदी में नैतिक के साथ लघु धार्मिक कहानी - Short religious story with moral in Hindi


 

Laghu dharmik Kahani in hindi ।। Moral story in hindi for religious ।। Best moral story in hindi

Moral story नैतिक कहानी पढ़ना सभी को अच्छा लगता है, एक तो इसमें सामाजिक और नैतिक ज्ञान होता है और साथ ही इससे हमें जानकारी भी प्राप्त होती हैं, खासकर बच्चों को। Moral story शिक्षा भी मिलती हैं। तो हम आज ऐसे ही प्रेरणा दायक कहानी आप लोगों के साथ शेयर कर रहे हैं। आशा करता हूं कि यह आपको पसंद जरूर आएगा। अगर यह पसंद आए तो इसे और लोगो तक शेयर जरूर करें।


मूर्ख ब्राह्मण - moral story in hindi for every one


एक गांव में सुमेश्वर नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था। वह मां दुर्गा का परम भक्त था। एक बार वह अपने गुरु की अज्ञा अनुसार मां दुर्गा की तपस्या करने का निश्चय किया। वह एक घने जंगल में चला गया। और एक बड़े से पेड़ के नीचे एक पैर पर खड़े होकर तपस्या करने लगा। बहुत दिन बीत गए। कड़ी धूप, बारिश तथा तेज हवा चली लेकिन सुमेश्वर वहीं डटा रहा।
और अपनी एकाग्रता भंग होने नहीं दिया। सुमेश्वर की कड़ी तपस्या देखकर मां दुर्गा उस पर प्रसन्न हो गई। और मां दुर्गा ने उसको दर्शन देते हुए बोली, वत्स आखे खोलो! मै तुम पर प्रसन्न हूं, बोलो तुम्हे क्या चाहिए। 
सुमेश्वर ने मा दुर्गा को प्रणाम किया। और बोला मां आपके दर्शन से ही मैं धन्य हो गया। और मुझे क्या चाहिए। तब मां दुर्गा ने कहा मेरा दर्शन अमोख है। इसलिए तुम्हें जो चाहिए वह मांग लों। तब सूमेश्वर ने मां से संजीवनी बूटी का वरदान मांगा। मां दुर्गा ने तथास्तु कहकर संजीवनी बूटी देते हुए बोली! वत्स यह संजीवनी बूटी है। इसे तुम जिस भी मृत व्यक्ति पर प्रयोग करोगे वह फिर से जीवित हो जाएगा। किसी भी मृत शरीर पर तुम इस पत्ते का रस छिडकोगे तो वह फिर से जीवित होकर पहले की तरह शक्तिशाली हो जाएगा। और यह संजीवनी ना कभी सूखेगी और नाही कभी खत्म होगी।इतना कहकर मा दुर्गा अंतर ध्यान हो गई।
संजीवनी बूटी पाकर सुमेंश्वर आनंदित हो उठा। और वो अपने गांव की ओर चल दिया। वह रास्ते में यह सोचने लगा कि इस संजीवनी की सहायता से मैं मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सकूंगा। और अब से गांव के किसी भी घर में दुख नही होगा। गांव के सभी लोग मेरी प्रशंसा करेंगे पूरे गांव में, मैं प्रसिद्ध हो जाऊंगा। ऐसा भी हो सकता है कि सब लोग मुझे गांव का सरपंच ही बना दे। चलते-चलते उसके मन में फिर एक अलग ही विचार आया। क्या कहीं मां दुर्गा ने मेरे साथ कोई मजाक तो नहीं किया। यह कोई साधारण से पत्ते तो नहीं है क्या यह सच में संजीवनी बूटी है। यह जानने के लिए मुझे कुछ न कुछ करना होगा। सूमेश्वर इधर-उधर देखते हुए कुछ खोजने लगा। तभी उसे रास्ते में एक मृत शेर दिखाई दिया। सुमेश्वर उस मृत शेर के पास गया। और सोचने लगा मैं संजीवनी बूटी का प्रयोग इस मृत शेर के ऊपर करके देखता हूं। फिर पता चलेगा कि यह असली है या नकली। सुमेश्वर ने उस संजीवनी बूटी के पत्ते को हाथ से मसलना शुरू किया। उसने बिना कुछ सोचे समझे उन पत्तो से निकला हुआ रस शेर के ऊपर छिड़क दिया।
उस पत्ते का रस मृत शेर के शरीर पर पड़ते ही। वह जीवित हो गया। सुमेश्वर तो बहुत खुश हुआ, और बोला यह तो सच में संजीवनी बूटी है। शेर बहुत बुढ़ा था और शिकार न मिलने के कारण भूख से मर गया था। संजीवनी के कारण वह न केवल जीवित हुआ बल्कि पहले से ज्यादा शक्तिशाली हो गया। जीवित होते ही शेर ने जोर से दहाड़ मारी जिससे सुमेश्वर डर गया। और बोला यह मैंने क्या कर दिया शेर को जीवित कर दिया अब मेरी खैर नहीं। सामने भूखा शेर देखकर सुमेश्वर इधर-उधर भागने लगा लेकिन शेर की ताकत के सामने टिक नहीं सका और शेर ने उसे मारकर खा गया।
सीख - इसलिए हम सभी को कोई भी काम करने से पहले उसके परिणामों के बारे में सोचें लेना चाहिए।




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