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स्वप्न पर एक नैतिक कहानी हिंदी में - A moral story on dream in Hindi

  



नमस्ते दोस्तो स्वागत है हमारे ब्लॉग पर आज हम आपके लिए एक स्वप्न पर आधारिक नैतिक कहानी लेकर आए हैं। यह कहानी क्लार्क नाम के एक छोटे से बच्चे की है। क्लार्क को पनीर बेहद पसंद है। लेकिन वह इसे खूब खाना चाहता है। इस कहानी में हम जानेंगे की क्लार्क की यह आदत कैसे  छुटती है।


पनीर की चाहत - World's famous Moral Story in Hindi

एक गांव था जहां बहुत सारी दुग्धशालाएं थी। वहां के लोग दूध तथा दूध से बनी वस्तुओं का व्यापार करते थे। वही उनकी आजीविका थी। क्लार्क एक किसान का पुत्र था और उसके पिता जी की भी एक दुग्धशाला थी। जहां दूध से दही, पनीर, छाछ, मक्खन आदि बना करता था। प्रतिदिन विद्यालय जाने से पूर्व क्लार्क दुग्ध साला जाकर अपने पिताजी की सहायता किया करता था। क्लार्क को पनीर बेहद पसंद था वह हर समय बस पनीर ही खाना चाहता था।

एक रात की बात है। सब ने रात्रि का भोजन कर लिया था। क्लार्क का पेट भरा हुआ था पर उसकी इच्छा थोड़ा और पनीर खाने की हुई पर उसकी मां ने पेट दर्द के भय से और पनीर उसे नहीं दिया। वह बहन के पास गया पर उसने भी उसे और पनीर नहीं दिया। क्लार्क रोता हुआ, भारी मन से सोने चला गया। उसके कमरे में एक चिमनी थी जिससे चांद की चांदनी भीतर आ रही थी। क्लार्क ने चांदनी को देखा तो उसे वह नाचती हुई सी लगी धीरे-धीरे चांदनी ने परी का रूप ले लिया। फिर उसे एक धीमी सी बुदबुदाहट अपने कान में सुनाई दी। “प्रिय क्लार्क’ मेरे साथ चलो मैं तुम्हें बहुत सारा पनीर दूंगी।

पल भर को क्लार्क को लगा कि वह कोई स्वप्न देख रहा है। उसने अपनी आंखें मिली और स्वयं को चिकोटी काटी तब उसे लगा कि यह स्वप्न नहीं सत्य हैं। परी पुनः बोली, मेरा विश्वास करो। चलो मेरे साथ मैं तुम्हें पनीर दूंगी

उसने पुस्तकों में चीड़ के जंगलों में रहने वाली परियों के विषय में पढ़ा था। पास में ही चीड़ का पेड़ था उसने सोचा कि यह परिया तो बिल्कुल पुस्तक की परियों जैसी है। उसने सोचा स्वयं जा कर देखता हूं। अपने जूते मोजे पहनकर वह चीड़ के जंगलों की ओर चुपचाप चल पड़ा। वहां उसे एक प्रकाश पुंज दिखाई दिया मानव ढेरों जुगुनू हो। नजदीक पहुंचने पर बहुत सारी चमकीली परियां नित्य करती दिखाई दी।

उसे देखकर सारी परियां एक साथ उसकी ओर दौड़ी आई एक ने कहा “प्रिय क्लार्क, आओ, आओ हमारे साथ नृत्य करो शेष परियों ने कहा चलो हम लोग तुम्हें खूब सारा पनीर खिलाऊंगी।

अगले ही पल क्लार्क को लगा जैसे वह पंख की तरह हल्का होकर आसमान में उड़ रहा हो। परियों ने उसका हाथ पकड़ा और वह भी उनके साथ-साथ नृत्य कर रहा है। धीरे-धीरे क्लर्क को आनंद आने लगा सुबह होने वाली था। क्लर्क नित्य करते थक गया था। इतना थक गया था कि कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला।

नींद में भी वह परियों के विषय में सोच-सोच कर मुस्कुराता रहा। उसे पनीर की याद आई और उसने सोचा कि अब परियां उसे पनीर देगी वास्तव में परियां एक बहुत बड़ा पनीर का टुकड़ा लेकर आ गई। एक परी ने चाकू से एक टुकड़ा काटा तो दूसरी ने उसे पनीर खिलाया वह पनीर अति स्वादिष्ट था। शायद अब तक का सबसे स्वादिष्ट। परिया उसे प्रेम पूर्वक पनीर खिलाती रही और वह प्रसन्नता पूर्वक उन्हें खाता रहा मन ही मन सोच रहा था यह कितना स्वादिष्ट है।

अब मेरी मां इसे खाने से नहीं रोक सकती। इतना ढेर सारा पनीर पर थोड़ी देर के बाद ही पनीर खाते-खाते उसके जबड़े दुखने लगे वह थक गया उसका पेट पूरी तरह भर गया था। पर परिया रुकने का नाम ही नहीं ले रही थी।

नई-नई परियां पनीर लेकर आती जाती थी और उसके सामने पनीर का ऊंचा पहाड़ बन गया था। अब बस वह और नहीं खा सकता था। उसे लगा कि उसका पेट गुब्बारे की तरह अब फट पड़ेगा यदि उसने थोड़ा भी और पनीर खाया तो... अचानक से पनीर का पहाड़ गिर पड़ा और क्लर्क के मुंह से चीख निकल पड़ी, बचाओ-बचाओ पनीर के पहाड़ से बचाओ’ और एक झटके के साथ उसने पनीर वहां से हटाना आरंभ कर दिया। पर यह क्या वहां तो कोई पनीर या पानी का पहाड़ नहीं था बल्कि सूखी घास का ढेर पड़ा था।

उसने अपनी आंखें खोलकर मली। सवेरा हो चुका था। सूरज सिर पर चढ़ आया था और चिड़ियों की चहचहाहट गुंज रही थी। वह उठकर बैठ गया, इधर-उधर देखा और तब उसे लगा कि वह अभी तक पनीर की स्वप्निल दुनिया की सैर कर रहा था। उसने सोचा। ईश्वर का धन्यवाद जो वह मात्र स्वप्न ही था। और अब क्लार्क उठकर चुपचाप अपनी नृत्य क्रिया में लग गया।

उस दिन के बाद से उसने पनीर खाना बंद कर दिया। मां को उसके इस व्यवहार से बड़ा आश्चर्य हुआ। इसलिए उसने कारण पूछा तो क्लार्क के मंद मुस्कान के साथ कहा, पनीर खाने से मेरा पेट दर्द करता है।



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