सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

ईमानदारी पर नैतिक कहानी हिंदी में - Moral story on honesty in hindi



Moral story in hindi for children ।। Unique moral story in hindi ।। Moral stories on morality in hindi

नमस्ते दोस्तो स्वागत है हमारे ब्लॉग पर आज हम आपके लिए नैतिकता के साथ लघु कहानी लेकर आए हैं। दोस्तो नैतिक कहानी पढ़ने से अच्छे संस्कार का विकास होता है। नैतिक कहानी पढ़ना बच्चों को काफी पसंद होता। नैतिक कहानी पढ़ने से बच्चो में समाजिक ज्ञान बढ़ता। इसलिए सभी बच्चों को नैतिक कहानी पढ़ना चाहिए।


ईमानदारी का फल - Moral story in hindi with good personality

बाबूलाल नाम का एक इमानदार पेंटर रहता था। वह अपना काम पूरी ईमानदारी से किया करता था। लेकिन वह बहुत ही गरीब था। वह घर-घर जाकर पेंट किया करता था। उसकी आमदनी बहुत कम थी, दिन भर की मेहनत के बाद भी वह केवल दो वक्त की रोटी जुटा पाता था। वह हमेशा चाहता था कि उसे कोई बड़ा काम मिले जिससे उसकी अच्छी आमदनी हो सके। पर वह छोटे-छोटे भी काम पूरी लगन और ईमानदारी से किया करता था।
एक बार उसके गांव के एक जमीदार ने उसे बुलाया और कहा! सुनो बाबूलाल तुम्हें एक जरूरी काम के लिए मैं बुलाया हूं। क्या तुम वह काम करोगे? बाबूलाल करता है, हां मालिक अवश्य करूंगा बताइए क्या काम है। जमींदार ने कहा मैं चाहता हूं कि तुम मेरा नाव पेंट करो, क्योंकि तुम एक अच्छे पेंटर हो लेकिन यह काम आज ही हो जाना चाहिए। बाबूलाल करता है जी मालिक आज ही मैं उसे पूरा कर दूंगा।
जमींदार बोला अच्छा यह बताओ कि तुम इस काम के पैसे कितने लोगे। बाबूलाल बोला मालिक वैसे तो इसके पंद्रह सौ रुपए हुए। बाकी आपको जो पसंद है, दे दीजिएगा।
जमीनदार बोला ठीक है तुम्हें पंद्रह सौ रुपए मिल जाएंगे। पर काम अच्छा होना चाहिए। बाबूलाल बोला मालिक आपको काम बढ़िया ही मिलेगा।
जमींदार बाबूलाल को नाव दिखाने नदी के किनारे ले गया। नाव देखने के बाद बाबूलाल पेंट लेने अपने घर जाता है। और पेंट लाकर नाव रंगने लगता है। नाव रंगते समय उसे नाम में एक छेद दिखाई देता है। बाबूलाल करता है, अगर इसे ऐसे ही पेंट कर दूंगा तो यह नाव डूब जाएगा पहले इस छेद को ही भर देता हूं।
ऐसा कहकर वह छेद को भर देता है। और नाव को रंग देता है। फिर वह जमींदार के पास जाता है, और कहता है मालिक नाव पेंट हो गया। आप चलकर देख लीजिए।
फिर वह दोनों नदी किनारे पहुंच जाते हैं नाव को देखकर जमींदार करता है। वाह बाबूलाल तुमने तो बहुत अच्छी पेंट किए हो। बाबूलाल तुम कल आकर अपने पैसे ले लेना। और फिर वे दोनों अपने-अपने घर चले जाते हैं।
जमीदार के परिवार वाले उस नाव में अगले दिन, नदी के उस पार घूमने जाते हैं। शाम को जमींदार का नौकर रामू जो उसकी नाव की देखरेख करता था। छुट्टी से वापस आता है। जमीदार के परिवार वाले को घर पर ना देखकर उसने उनके बारे में पूछता है। जमींदार उसे सारी बात बताता है, जमीदार की बात सुनकर रामू चिंता में पड़ जाता है। उसे चिंतित देखकर जमीदार रामू से पूछता है, क्या हुआ तुम इतने चिंतित क्यों हो?
फिर रामू बोलता है, सरकार उस गांव में तो छेद था। रामू की बात सुनकर जमीदार चिंतित हो जाता है। तभी उसके परिवार वाले पूरा दिन मौज मस्ती करके घर वापस आ जाते हैं। उन्हें सह कुशल देखकर जमींदार चैन की सांस लेता है।
फिर अगले दिन जमीदार ने बाबूलाल को बुलाता है। और कहता है यह लो बाबूलाल तुम्हारी मजबूरी तुमने बहुत बढ़िया काम किये हो मैं बहुत खुश हूं। 
जब बाबूलाल पैसे लेकर गिनता है तो, वह हैरान रह जाता है। क्योंकि वह पैसे ज्यादा थे। फिर बाबूलाल कहता है।
मालिक आपने गलती से ज्यादा पैसे दे दिए हैं। फिर जमीदार करता है नहीं बाबूलाल यह मैंने तुम्हें गलती से नहीं दिया हूं। यह तुम्हारे मेहनत और ईमानदारी के ही पैसे हैं। लेकिन हमारे बीच तो सिर्फ पंद्रह सौ रुपए की बात हुआ था। यह तो पांच हजार है। तो यह मेरी मेहनत का कैसे हुआ, जमींदार बोला क्योंकि  तुमने एक बहुत बड़ा काम किये हो।
बाबूलाल बोला, कैसा काम, जमीदार बोला तुमने इस नाव के छेद को भर दिया, जिसके बारे में मुझे पता भी नहीं था। अगर तुम चाहते तो इसे ऐसे ही छोड़ सकते थे। फिर तुम उसके लिए और पैसे मांग सकते थे। पर तुमने ऐसा बिल्कुल भी नहीं किया। जिसकी वजह से मेरे परिवार वाले उस नाव में सुरक्षित घूम सकें अगर तुम उस छेद को ना भरते तो वह डूब जाते।
आज तुम्हारी वजह से ही मेरा परिवार सुरक्षित है। इसलिए पैसे तुम्हारे मेहनत और ईमानदारी के हैं, इसे तुम रख लो।
बाबूलाल जमींदार को धन्यवाद करते हुए खुशी-खुशी घर चला जाता है।





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

भगवान गौतम बुद्ध को आत्मज्ञान की प्राप्ति कैसे हुई - वैशाख पूर्णिमा और बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति

सिद्धार्थ जब कपिलवस्तु की सैर पर निकले तो उन्होंने चार दृश्यों को देखा उन्होंने सबसे पहले एक बूढ़े व्यक्ति को देखा तो उन्होंने अपने सारथी से पूछा की यह कौन है। तब सारथी ने कहाँ की यह एक बूढ़ा व्यक्ति है तब सिद्धार्थ ने पूछा की यह बूढ़ा व्यक्ति क्या होता है तो उनके सारथी ने कहा कि एक दिन सभी को बुढ़ा होना है। तब सिद्धार्थ ने पूछा की मैं भी बूढा हो जाऊंगा? तो सारथी ने कहा  हा एक दिन आप भी इनके जैसा हो जायेंगे। फिर सिद्धार्थ और आगे बढे तो उन्होंने एक बीमार व्यक्ति को देखा तो सिद्धार्थ ने फिर सारथी से पूछा की यह कौन है। तब वह सारथी बोला यह एक बीमार व्यक्ति है, यह किसी को हो सकता है।  इसके बाद वह और आगे बढे तो सिद्धार्थ ने एक शव को देखा फिर वह सारथी से पूछते है कि यह क्या है, तब सारथी बोला यह सब एक मृत व्यक्ति को लेकर जा रहे है इस संसार में जो जन्मा है उसको एक दिन मृत्यु को प्राप्त होना ही है। फिर वह अंत में एक सन्यासी को देखा फिर वह सारथी से पूछते है तब वह सारथी बोला की यह एक सन्यासी है यह अपना घर, परिवार और सारी सम्पति का त्याग कर साधु बनकर भगवान की पूजा करता है। यह सब देखने के बाद वह बह

जैसा आप सोचते है, आप वैसे ही बन जाते है भगवान बुद्ध की प्रेरणा दायक कहानी - Best Gautam Buddha stories in hindi for life

  Story of Gautam Buddha in hindi ।। Gautam Buddha story in hindi ।। Gautam Buddha life story in hindi ।। Siddharth Gautam Buddha story in hindi एक बार गौतम  बुद्ध और उनके शिष्य एक वन से गुजर रहे होते है। बहुत दूर चलने के बाद भगवान बुद्ध के शिष्य बुद्ध से कहते है, बुद्ध क्या हम कुछ देर विश्राम कर सकते है। बुद्ध कहते है, अवश्य अब हमे विश्राम करना चाहिए, ओ देखो एक बड़ा वृक्ष है। हम उसके नीचे विश्राम करेंगे। बुद्ध और उनके सभी शिष्य उस वृक्ष के नीचे बैठ जाते है। उनमें से एक शिष्य ने बुद्ध कहता है, बुद्ध आपने हमसे एक बात कही थी कि! हम जैसा सोचते है हम वैसा ही बन जाते है। कृपा करके इस कथन को विस्तार से समझाइए, बुद्ध कहते है अवश्य, मै तुम्हे एक छोटी सी कहानी सुनाता हूं। एक नगर में एक बहुत धनी सेठ रहता था। उसके पास धन की कोई कमी नहीं थी। परन्तु फिर भी हर समय धन इकट्ठा करने के बारे में सोचता रहता था। एक बार सेठ के घर उसका एक रिश्तेदार आता है। सेठ उसकी खूब खातेदारी करता है। बातों-बातों में सेठ का रिश्तेदार सेठ से कहता है, अरे सेठ जी हमारे नगर में एक नामी गिरामी सेठ रहता था। वह आप से ज्यादा धनवान