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लघु साहसिक कहानियाँ हिंदी में - Short adventure stories in hindi

 


Hindi Short Adventure Stories of Class 7 ।।  Sahas kahani in hindi


नमस्कार मित्रो स्वागत है हमारे ब्लॉग पर आज हम आपके लिए लघु साहसिक कहानी लेकर आए हैं। जिसे पढ़ने से आपमें एक सकारातमक ऊर्जा का संचार होगा। मित्रो हम सभी के जीवन में कुछ न कुछ परेशानियाँ आती हैं। लेकिन उस समस्या के समय जो लोग धैर्य से काम करते हैं। वहीं लोग जीवन में आगे बढ़ते हैं।

साहसी चिंटू और पिंटू - Short adventure story in hindi for each one

एक बार की बात है। प्रेम नगर में चिंटू और पिंटू नाम के दो भाई अपने माता-पिता सुधा और विनीत के साथ रहते थे। एक बार सुबह के समय परिवार के सभी लोग साथ में खाना खा रहे थे। तभी उसी समय फोन बजने की आवाज आती है। चिंटू की मां जाकर फोन उठाती है। तो उन्हें पता चलता है कि उनके पिता की तबीयत अचानक खराब हो गई है। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुधा तुरंत अपने पति विनीत से बताती है। कि मेरे पिताजी की तबीयत खराब है हमें उन्हें देखने के लिए जाना होगा।
तभी चिंटू और पिंटू भी उनके पास आते हैं। और पूछते हैं पापा क्या हुआ? तब विनीत बोला, तुम्हारे नाना जी की तबीयत अचानक खराब हो गई है। वह अस्पताल में भर्ती है। मुझे और सुधा को आज ही जाना होगा। देखो बच्चों मै पड़ोस वाले दादाजी को तुम्हारे पास सोने के लिए कह दूंगा। दोनों बच्चों ने कहा कि ठीक है पापा।
विनीत ने सबसे पहले पड़ोस के रामरतन काका के पास जाता है। और उन्हें पूरी बात बताई और बोला काका सुधा के पिता की अचानक से तबीयत खराब हो गई है। वह अस्पताल में भर्ती है तो हम लोगों का जाना जरूरी है। बच्चों की परीक्षाएँ हैं, नहीं तो उन्हें भी साथ ले जाते। सुना है आजकल एक चोरों का गिरोह शहर में आया हुआ है। अगर आप चिंटू और पिंटू के पास सो जाएंगे तो वह डरेंगे नहीं।
रामरतन काका ने कहा! तुम लोग निश्चित होकर जाओ मैं दोनों बच्चों का ध्यान रखूँगा। विनीत काका को धन्यवाद किया। रामरतन काका ने विनीत से पूछते हैं! वैसे तुम लोग कब तक वापस लौटोगें? विनीत बोला हम लोग तीन दिन बाद आएंगे।
फिर विनीत घर वापस आता है। और चिंटू और पिंटू से कहते है। देखो बच्चों मैं रामरतन काका को कहकर आया हूं। वह रात को यहाँ आकर तुम्हारे साथ सो जाएगा। यह कहकर विनीत सुधा को लेकर चला जाता है।
रामरतन काका रोज आकर उनके साथ सो जाते हैं। दो दिन तो सब ठीक रहा है। तीसरे दिन रात में काका तो सो गए और दोनों भाई साथ में पढ़ रहे थे। बस वे दोनों सोने की तैयारी ही कर रहे थे कि, तभी दरवाजे से आवाज आती है। जैसे कोई दरवाजा खोलने का प्रयास कर रहा हो। दोनों भाई जानते थे कि इस समय उनके माता-पिता नहीं होंगे। इसलिए वे ज्यादा ध्यान नहीं दिए लेकिन बच्चों को फिर से उसी तरह आवाज सुनाई दी।
तब बच्चों ने दरवाजे के होल से देखा तो उन्हें तीन चार लोग मुंह बांधे दिखे। बच्चे समझ गए कि यह पक्का चोर है। दोनों दौड़कर रामरतन काका के पास गए और उन्होंने बताया कि दरवाजे पर चोर है। चोर का नाम सुनते ही रामरतन काका डर जाते हैं। और उनके हाथ पैर कांपने लगते हैं। तब बच्चों ने सोचा कि उन्हें ही कुछ करना होगा।
तभी चिंटू के दिमाग में एक विचार आता है। वह अपने भाई को इसके बारे में बताता है। फिर चिंटू दरवाजे के पास जाता है और पिंटू खिड़की के पास जाता है। चिंटू दरवाजे पर जाकर ऐसी बात करता है, मानो वह फोन पर पुलिस से बातें कर रहा हो।
तभी चोरों की आवाज आती है सुनो जल्दी दरवाजा खोलो हम डरने वाले नहीं हैं। चिंटू करता है, हां हां मत डरो अभी पुलिस आयांगे तो अपनी हिम्मत उन्हें दिखाना। तभी पिंटू अपना खिलौना खिड़की से बाहर निकालता है। और उसमें से सायरन की आवाज निकलती है। सायरन की आवाज़ सुनते ही चोर वहाँ से तुरंत ही रफूचक्कर हो जाते है।

सीख - परिस्थिति कैसी भी हो अगर हम अपनी बुद्धि और विवेक से काम करेंगे तो हम बड़ी से बड़ी समस्याओं को हरा सकते हैं।

 

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